भवदीय निवेदक "ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ उत्तर प्रदेश }

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रविवार, 29 जनवरी 2012

संवत २०६९ में "ग्रहण" भारत में प्रभावहीन होगा ?

संवत २०६९ में "ग्रहण" भारत में प्रभावहीन होगा ?
 २३मार्च २०१२ से १०अप्रैल २०१३तक -की समयावधि में समस्त भूमंडल पर दो -सूर्य ग्रहण एवं एक चंद्रग्रहण होगा ,किन्तु भारतीय  भूभाग पर किसी भी ग्रहण को नहीं देखा जा सकेगा । अर्थात इस वर्ष भारत में ग्रहण प्रभावहीन माना जायेगा  ।
  भारत से अन्य देशों में खग्रास "सूर्यग्रहण "
  २०-२१ मई २०१२ रविवार की रात्रि में खग्रास "सूर्यग्रहण "भारत के वाहर अन्य देशों में होगा । भारतीय समय के अनुसार -ग्रहण ३-४० से शुरू होगा जो सुबह ७-०६ पर समाप्त होगा । प्रभावित देश -कनाडा,चीन ,ग्रीनलैंड ,इंडोनेशिया ,जापान ,कजाकिस्तान ,उत्तरिकोरिया ,दक्षिनकोरिया ,मैक्सिको ,मंगोलिया ,नार्वे ,फिलिपिन्स ,रूस ,ताइवान  एवं उत्तरी अमेरिका आदि देशों में देखा जा सकेगा ।। 
  नोट -भारत में ग्रहण कहीं से भी दिखाई नहीं देगा ?"
भारत से अन्य देशों में अल्पग्रास "चंद्रग्रहण  "
 ४-जून-२०१२ सोमवार को दिन में अल्पग्रास चंद्रग्रहण  भारत के अन्य पूर्व देशों में होगा । भारतीय समयानुसार -ग्रहण  दिन में ३-बजकर २९ मिनट से शुरू होगा जो -सायं -५-३७पर समाप्त होगा । प्रभावित देश -म्यांमार  ,थाईलैंड ,जापान ,आस्ट्रेलिया ,चीन ,पुर्विरूस ,मलेसिया ,फिलिपिन्स ,इंडोनेशिया ,उत्तर  -दक्षिण  ,अमेरिका ,पेरू ,अर्जेंटीना  ,आदि देशों में देखा जा सकेगा ।
  नोट -भारत में ग्रहण कहीं से भी दिखाई नहीं देगा -किन्तु देश के पूर्वी  भाग -आसाम ,मिजोरम ,मेघालय ,अरिनाचल प्रदेश ,आदि में चंद्रमा विरल छाया में से होकर गुजरेगा -जिसे वास्तव में ग्रहण  नहीं माना जाता है । 
 भारत के बाहर देशों में खग्रास "सूर्यग्रहण "
दिनांक -13-१४ नवंबर २०१२ मंगलवार की रात्रि २ बजकर  ६मिनत से शुरू होगा जो बुधवार  की सुबह ५ बजकर १७मिनत पर समाप्त होगा ।इस ग्रहण को अमेरिकन समोआ ,अर्जेंटीना ,आस्ट्रेलिया ,चिली ,फिजी ,इंडोनेशिया  ,मैक्रिनेशिया ,न्यूजीलेंड  ,न्युगुनिया ,आदि देशों में देखा जा सकेगा ।
   नोट -भारत में ग्रहण कहीं से भी दिखाई नहीं देगा ।।
चंद्रमा विरल छाया से गुजरना-
२८-११-२०१२बुधवार को "चंद्रमा "विरल छाया से गुजरेगा । अतः मामूली सी कांति मलिन दृश्य  होगी । उप्छ्यी ग्रहण नहीं होता ,इसलिए मान्यता नगण्य होती है । ग्रहण पृथ्वी के जिस भाग पर हुआ करते हैं उनका शुभाशुभ फलित उन्हीं स्थानों पर घटित होते हैं ।।
  --यननक्षत्रगतो राहुर ग्रसते शशिभास्करो ।
      ताज्ज्तानाम भबेत पीड़ा ये नराः शांतिवर्जिताः ।।
    यस्य राजस्य नक्षत्रे  स्वर्भानु रूप्ज्य्ते ।
          राज्य भंग सुह्यान्नाशम मरणं चात्र निर्दिशेत ।।
भवदीय "ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ }
 ज्योतिष सेवा एकबार अवश्य मिलेगी सभी मित्रों को रात्रि ८ से९ -09897701636 ,09358885616

 

बुधवार, 25 जनवरी 2012

" Have a nice day,Ram Ram,Namskaar"

"Great words""
   The one that angers you controls you,
    Don?t give anyone that power especially the one who does it intentionally,
       " Have a nice day,Ram Ram,Namskaar"

रविवार, 1 जनवरी 2012

"Simple and beauty of the Pratik -" Gemini - the amount "2012?"

"Simple and beauty of the Pratik -" Gemini - the amount "2012?"



 
Gemini people - simple and mild | see all the affection in the Jataka are Gemini | Middle stature, grow with time, anger and depress the attribute is in the mind |



      
What joys and sorrows of the people of Gemini in 2012 - in the path Gujrengen - a look to astrology? "


= Wonderful pleasure to | brother - brothers get pleasure | power will triumph in | easy growth path will | education, children, job gains in the area will have | to health problems would | must deal with enemies | Mama {maternal} will not cooperate with luck - will show progress and decline both | the costs will remain constant sum | Your efforts will be worthwhile but would hope with the help of his wife's support friends |



  
{1} - be joyful mind throughout the year, can expect continued support from parents, children, jobs, education'll be Biseshyog |



 
{2} - {maternal uncles that would not count on the stand, shall be subject to disease, expense humbug will |



      
Note - Sun will be the rise of worship | Wednesday, do not borrow, do not | get peace on Saturday to feed the dog Dud | in charge do not work will be beneficial emerald and diamond gems |



          
Happy New Year?



 
Astrology service will come once all friends Samprksutr by {}



   
- Re-pay the membership fee for the service?-09897701636,09358885616

सोमवार, 21 नवंबर 2011

"ज्योतिष सेवा सदन -सूचनापट"?"

     "ज्योतिष सेवा सदन -सूचनापट"?"
     मित्रप्रवर राम राम ,नमस्कार ||
           दिनांक -१८-११-२०११से १०-१२-२०१२ तक ज्योतिष सेवा उपलब्ध नहीं रहेगी || हमें खेद है ||
         भवदीय निवेदक "ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "
                यदुवंश गंगा त्रिमासिक पत्रिका मेरठ एवं टीकमगढ़ {उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश }-०९८९७७०१६३६,09358885616 

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

"तुला में शनि का प्रवेश,क्या है! ज्योतिष का सन्देश ?"

     "तुला में शनि का प्रवेश,क्या है! ज्योतिष का सन्देश ?"  
 यूँ तो कुंडली चक्र  का भ्रमण करने में शनिदेव को ३० वर्ष लगते हैं | एक राशि में ढाई  वर्ष रहते हैं | जिस राशि में रहते हैं -उस राशि के जातक को -अपना पूर्ण स्थिति के अनुसार लाभ {अर्थात -शनि -के उच्च या नीच तथा अंश के अनुकूल } या हानी पहुँचाते हैं| शनि की दृष्टि जहाँ पड़ती है -वो जगह शनि के कारण विपरीत हो जाती है | शनि को ज्योतिष में न्यायाधीश का पद प्राप्त है ,इसलिए शनि न्याय के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रहते हैं ,उनके आगे जो भी पड़ते हैं -उसे अपने कर्म के अनुसार यातनाएं  भोगनी ही पड़ती है,तभी तो लोग डरते हैं |आइये जानते हैं -तुला राशि में शनि - आगमन  से  किस राशि के जातक को क्या -क्या हानी या लाभ होने वाले हैं |
          ---सूर्यपुत्रोतुलायाति ह्युगंपप्द्रव  मादिशेत |
                सप्त धान्य महार्धानी ,मेदिनी नष्ट कारिका ||
जब सूर्य पुत्र  शनि -तुला राशि में हों - तो -उपद्रव  बहुत होते हैं ,जन -जन में,देश - विदेशों   में ,प्रकृति की मार बहुत पड़ती है जिससे अन्न -धन  एवं जीवन को नुकशान पहुँचते हैं | 
         "तुला वृश्चिक चापेशु यदि याति शनैश्चरः|
            न वर्षन्ति तदा मेघाः पृथ्वी दुभिक्ष पीडिता |
---के अनुसार जब शनि तुका राशि में हों तो -वर्षा - का आभाव या प्राकृतिक विपदा आती है -जीव- जंतुओं पर |
         {१}-सिंह - राशि के जातक मुक्त होंगें -शनि की साढ़े साती से |
          {2}-कन्या राशि के जातक अभी साढ़े साती से ग्रसित रहेंगें ,किन्तु पीड़ा  कुछ कम होगी |
          {३}-तुला राशि के जातक -शनि की कृपा  के पात्र  बने रहेंगें यदि कुंडली में शनि की स्थिति अच्छी  होगी तो अच्छा फल या बुरा प्रभाव  भी झेलने  होंगें |
           {४}-वृश्चिक राशि के -जातक -शनि की पीड़ा का कुछ अहसास  करेंगें ,सावधानी बरतनी पड़ेगी अपने सभी कार्यों में |
   --- मेष -राशि के लिए -स्वस्थ एवं दाम्पत्य  सुख  में बाधा  आ  साती है | वृष  -राशि वालों के लिए -स्वास्थ में परिवर्तन एवं  कुछ पड़ेशानी होगी | मिथुन राशि -भाग्योदय होगा ,लाभ के सुअवसर  मिलेंगें | कर्क राशि -मिला जुला असर होगा ,रहत मिलेगी | सिंह राशि -नौकरी एवं पिता से लाभ मिलेंगें | कन्या राशि -धन के आगमन में कुछ देर हो सकती है,तथा स्वास्थ के प्रति सचेत रहें | तुला राशि -मन प्रसन्न रहेगा , कितु  रोग और क्लेश से 
घिरे रहेंगें | वृश्चिक राशि -संगती से हानी होगी ,धन को रखना सीखें | धनु राशि -पराक्रम एवं भाई बहिनों से जूझना पड़ेगा |  मकर राशि -कर्म क्षेत्र  से लाभ होगा ,विवाद से बचें  | कुम्भ राशि -भाग्य चमकेगा ,सम्पत्ति के विवाद से पीड़ा होगी |मीन राशि -आयु बढ़ेगी ,धन की हानी होगी ,अपने पराये होंगें ,किन्तु जीत आपकी ही होगी ||
  भवदीय "झा शास्त्री "
 ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ }
    निःशुल्क ज्योतिष परामर्श -रात्रि ८ से ९ संपर्क सूत्र द्वारा प्राप्त करें {मित्र बनकर }{फेसबुक ,जीमेल , ऑरकुट ,ट्विटर ,इबीबो ,होट्मेल,याहू -पर  }०९८९७७०१६३६,

शनिवार, 12 नवंबर 2011

Nice saying

     "Nice saying:-
"Every one has a "Best friend" During each stage of life",
  But ---"Only lucky ones have the same friend in all stages of life,"
           {Have a nice day,Ram-Ram,Namskaar}
  From"Meerut-"jha shastri"
              oll friends-jyotish seva 8 to9 pm-09897701636,09358885616 

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

Have a nice day

      "When
        Everybody is ready to "Help"
            But--
When you need "Help"
      Everybody gives u only"Advice"
            take care so depend urself...!!
{Have a nice day,Ram-Ram,Namskaar}
       By-"jha shastri"Meerut
      oll friends jyotish seva-8to9pm-con-09897701636,09358885616 you need "Advice"
         

बुधवार, 9 नवंबर 2011

"देश -विदेश-पाक्षिक ज्योतिष प्रभाव ?" ११-११से २५-११-२०११तक |

     "देश -विदेश-पाक्षिक ज्योतिष प्रभाव ?" ११-११से २५-११-२०११तक |
     "सूर्यपुत्रो तुलायाति हुयुग्नु पद्रव मदिशेत |
         सप्तधान्य महार्घानी मेदिनी नष्ट कारिका  ||
 शलोक के अनुसार-तुला राशि का शनि साल के अंत तक कहीं न कहीं -विवाद ,युद्ध ,क्लेश कराता ही रहेगा |  
          सभी अनाज मंहगे होते रहेंगें |विश्व का कोई देश या प्रदेश  अथवा महासागर तहस नहस हो सकता है |तृतीया तिथि के बढ़ने से युद्ध हो सकता है |{कहीं भी किसी भी जगह }
       "मार्गशीर्षे कृष्ण पक्षे तिथि ब्रिधिश्च जायते,तदा युधा कुला पृथ्वी प्रजा क्रन्दति नित्यशः ||
तिथि बढ़ने से यूरोप के देशों में आपसी विवाद बढेंगें |समुद्र देश  सैन्यबल बढानें की कोशिश करेंगें |पडौसी देश को विशेष सहयोग मिल सकता है |सीमा पर युद्ध भी संभव है ||
        तेजी मंदी --सभी वस्तुओं के भाव बढेंगें |फसलो को क्षति पहुंचेगी |तभी तो बाजार के भाव बढेंगें |
       आकाश लक्षण --आंधी तूफान ,बूंदा -बूंदी के योग हैं |विश्व - के किसी भी देश में प्राकृतिक तवाही संभव है -जो जानलेवा होगा | पर्वतीय क्षेत्र में -हिमपात ,शीतलहर एवं यातायात में लोगो को बाधा सहनी पड़ेगी |
       भवदीय -कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
             निःशुल्क ज्योतिष सेवा -रात्रि ८ से९ कोई भी प्राप्त कर सकते हैं |   
 

सोमवार, 7 नवंबर 2011

"आपकी राशि-सप्ताहिक विचार ?" दिनांक -७-११-२०११से १३-११-२०११ तक !

"आपकी राशि-सप्ताहिक विचार ?" 
     दिनांक -७-११-२०११से १३-11-२०११ तक !
  {१}-मेष -मन अशांत किन्तु ,पत्नी से सुख मिलेगा |धन के प्रति चिंतित रहेंगें | शिक्षा ,संतान से लाभ के योग हैं ,कलेश न करें ,स्वास्थ के प्रति सजग रहें ,नौकरी से लाभ होगा,{गुरु की पूजा से मन प्रसन्न रहेगा | रुका हुआ काम बन सकता है |
    {२}-वृष-उलझने पड़ेशान कर सकती हैं,धन का योग बनेगा ,संपत्ति ,वाहन के योग बनेंगें ,शत्रु और रोग से बचे रहें अहित होगा ,दाम्पत्य प्रेम बनाये रखें अन्यथा दरार आ सकती है, अनाप सनाप खर्च करने पड़ेंगें {गुरूवार को -गाय की सेवा करें }
     {३}-मिथुन -शत्रु को अपनी वाणी से रोग को अपने विचार से जीत लेंगें |उम्मीद के अनुसार लाभ के योग बनेंगें ,प्रभाव बरकरार रहेगा ,शिक्षा ,नौकरी,संतान के योग हैं ,आय के लिए कोशिश करते रहें लाभ जरुर मिलेगा |{शनिवार को कुत्ते के शावक को दूध पिलायें }
      {४}-कर्क -धन और बल के प्रभाव से युक्त रहेंगें ,संपत्ति ,वाहन ,माता से -शत्रुता हो सकती है ,समयानुसार पथ पर चलें ,शिक्षा ,नौकरी तथा उन्नति होगी सभी क्षेत्रों में ,पिता एवं कर्मक्षेत्र के प्रति सजग रहें लाभ ही होगा {शिव की उपासना करें }
       {५}-सिंह -आपका प्रभाव रहेगा निरंतर बना रहेगा ,शान और शौकत के बल पर जीते रहेंगें ,भाय बंधुओं से विरोध भी होता रहेगा , संपत्ति ,वाहन ,एवं माता से लाभ मिलेंगें ,भाग्य के सहारे जीयेंगें जो लाभदायक भी  रहेगा {पीपल की पूजा लाभ दायक रहेगी }
          {६}-कन्या -रुका हुआ काम बन सकता है ,किन्तु खर्च के प्रति सावधान रहें ,भाय बंधुओं से लाभ होगा किन्तु विवाद भी होंगें ,स्वास्थ गड़बड़ रहेगा ,भाग्य कुछ बिलम्ब कर सकता है -पर उदास न हो लाभ मिलेगा |{ विष्णु की पूजा करें या अपने आराध्य देव  पर भरोसा जरुर रखें }
           {७}-तुला -मन को खिन्न न रखें ,लाभ जरुर मिलेगा ,अनायास लाभ होगा ,विवाह में देर जरुर किन्तु -होगा ! उदर रोग से बचें , भ्रमण होगा .प्रगति होगी ,लाभ के सुअवसर  को न गमायें,शत्रु भी मित्र  बनेंगें -कुछ विशेष  उपहार की वस्तु मिल सकती है |{-तंत्र  न करें ,मंत्र  राह  चलें }
           {८}- वृश्चिक -अपनी प्रभुता बरकरार रहेगी ,शान से समय  कटेगा  ,दाम्पत्य जीवन को सुखमय  बनायें  कलेश   न करें हानी  होगी ,शत्रुओं  से छले  जायेंगें  बचकर   रहें ,बनी  बात बिगड़ सकती है ,
  कर्मक्षेत्र एवं पिता तथा अधिकारी से लाभ के योग हैं {सूर्य की उपासना अच्छी रहेगी}  
            {९}-धनु -शिक्षा ,संतान एवं नौकरी के क्षेत्र में संघर्ष करने पड़ेंगें,किन्तु लाभ मिलेगा ,रोग और सत्रुओं से न घिरें -हानी होगी ,भायोदय होगा ,मकान वाहन के योग बनेंगें , आय की राह कठिन किन्तु विशेष लाभ के लिए इन्तजार करना पड़ेगा {शनि की उपासना करें }
           {१०}-मकर -पिता एवं नौकरी से लाभ मिलेंगें ,अधिकारी से लाभ होगा देर की चिंता न करें ,सम्पति ,वाहन ,माता से विवाद न करें ,समयानुसार लाभ मिलेगा ,संतान ,नौकरी से अनायास लाभ तो अनायास हानी भी होगी ,आय के लिए प्रयत्न करें जरुर लाभ होगा {गुरूवार -को सात्विक भोजन करें,शनिवार को पशुओं को चारा खिलाएं }
        {११}-कुम्भ -भाय बंधुओं से विवाद न करें ,पराक्रम के क्षेत्र में संघर्ष करने पड़ेंगें ,सम्पति ,वाहन ,के अनायास योग बनेंगें ,पत्नी का भाग्य आपका साथ देगा ,भाग्योदय होने वाला है ,शाशक पद का दुरूपयोग न करें अहित होगा ,आपका परिश्रम लाभ देगा {मन को स्थिर रखने  में ही लाभ होगा-देवी की उपासना करें }
       {१२}-मीन -धन के प्रति चिंतित न हो -लाभ मिलेगा देर से ,अनायास कोई मदद कर सकता है ,समय बदल जायेगा -सुख की अनुभूति होगी ,स्वास्थ भी ठीक रहेगा ,भाग्योदय होगा ,विदेश यात्रा होगी ,शाशन पर नियंत्रण होगा ,समय आपका साथ देगा {गाय की पूजा करें ,कुत्ते को दूध पिलायें शनिवार को }
           भवदीय निवेदक "ज्योतिष सेवा सदन  "झा शास्त्री "
                 निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि ८ से९ कोई भी मित्र बनकर  प्राप्त कर सकते हैं -०९८९७७०१६३६,09358885616      
        

शनिवार, 5 नवंबर 2011

Gud Morning

"Failures are just god's way of saying:      Never give up,Be patient,Work hard&Have faith":-}
                   By-"jha shastri" Free of cout oll friends-8to9 pm-jyotish seva-09897701636,09358885616,
                   {Gud Morning,Ram-Ram,Namskaar}

गुरुवार, 3 नवंबर 2011

Gud Morning

     "A good heart&a good nature are 2 dfrnt issues,
          A good heart can win many relationships,
                     But a good nature can win & sustain lifelong
                                        Relationship...!!
                           {Gud,Morning,Ram-Ram,Namskaar}
By"jha shastri"{Meerut-uttar pradesh}
                         oll friends free jyotish seva-8to9-pm
                               cont-09897701636,09358885616

बुधवार, 2 नवंबर 2011

Have a nice day

"Wen u r hurt by ur close one,
               Do fight wid them becoz the fights saves a relation,
Bt being quiet leaves nothing in a relation...!!
                  {Have nice day,Ram-Ram,Namskaar}
     From-"jyotish seva sadan"jha shastri"Meerut
                           free of coust-jyotish seva-8to9pm{oll friends}
                                      cot-09897701636,09358885616 

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

" देश एवं विदेश -घटित -घटना {पाक्षिक जानकारी } २७-१०-से १०-११-2011 तक ?

      " देश एवं विदेश -घटित -घटना {पाक्षिक जानकारी } 
               २७-१०-से १०-११-2011 तक ? 
--यत्र मासे पंचावाराहा जायन्ते च ब्रेहस्पतेह |
    विग्रहः पश्चिमे देशे खंग  युद्ध च जायते ||
                   भाव -जिस मास में -५ गुरूवार पड़ते हैं | उस मास -पश्चिम के देश तथा अपने देश के प्रदेशों में भारी-कलेश एवं संघर्ष के योग बनते हैं | युद्ध ,उत्पात ,भय एवं आतंक तथा प्राकृतिक आपदा से -जीव -जंतु दुखी होते हैं |सत्ता प्राप्ति के लिए लड़ाई चरम सीमा पार कर जाती है ||
     साथ ही बुध एवं शुक्र के अच्छे योग होने से -अन्न का उत्पादन बढ़ जाते हैं | तकनीकी एवं रोजगार के सुअवसर मिलते हैं | जन -जन में हर्ष होने लगते हैं |
      तेजी मंदी विचार -यदा सिंह गतो भौमः -के अनुसार -सिंह[राशि} का मंगल -सोना -चांदी,तम्बा एवं लाल रंग की सभी वस्तुयों में तेजी आ जाती है | अन्य ग्रहों के योग से -ऊनी-सूती  वस्त्र,मूंगफली ,चना ,सूरजमुखी,सोयाबीन ,तथा भवन के सामान ,शेयर -शर्राफा  में तेजी के योग बनने लगते हैं | पूर्णिमा तिथि में भरणी नक्षत्र एवं व्यतिपात योग के संयोग हानिकारक भी होते हैं |{रोग प्राकृतिक मार के साथ -साथ घनघोर संकट के योग भी बनते हैं }
   आकाश लक्षण -ग्रहों के अनुसार -भूमि पाताल नाड़ी वेध के कारण मौसम अनुकूल नहीं रहेगा | 
          -पक्ष के प्रारंभ एवं अंत में वर्षा ,मेघ गर्जन ,भुकम्पादी विशेष उत्पात की संभावना बन जाती है |
        पहारी क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है | उत्तर भारत भी धीरे -धीरे ठंढ से आवेष्टित हो जाता है|\
                        भवदीय निवेदक "ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री  "{मेरठ  -उत्तर प्रदेश  }
                                    निःशुल्क ज्योतिष सेवा -रात्रि ८ से ९ सभी मित्रों के लिए "फेसबुक " पर उपलब्ध रहती  है | सम्पर्कसूत्र -09897701636,09358885616 

सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

"दीपावली "विशेषांक ?

  "दीपावली "विशेषांक ?
मित्रप्रवर ,राम -राम नमस्कार |
       ५६ कोटि देवता "गो माता की देह में निवास करते हैं | इसलिए गाय की पूजा से ही देवता प्रसन्न हो जाते हैं | कर्मकांड के प्रतिपादक -शांडिल्य ऋषि -के अनुसार वर्ष के प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता को प्रसन्न करने के लिए पूजा का विधान है | जिस प्रकार से अहर्निशं में किसी भी एक पल अपना मन यदि परमात्मा में लग जाय तो पूजा सफल हो जाती है | इसी प्रकार से -ज्योतिष विद ने -पूजा का समय भी निर्धारित किये हैं | लग्न तीन प्रकार के होते हैं -स्थिर ,चल, एवं द्विस्वभाव | नाम के अनुसार प्रभाव भी होते हैं ,लक्षी चंचला हैं इसलिए इनके साथ गणपति जी की पूजा होती है ताकि -धन मिले तो -उसका हम अपने विवेक से खर्च करें | किन्तु -लक्ष्मी के कई रूप हैं -खजाना रुपी धन के लिए -कुवर जी की पूजा होती हैं साथ ही उत्तर दिशा में खजाना भी रखना चाहिए | निशा रात्रि में -चौमुखी तेल के दीपक से -यमदेव की भी पूजा करनी चाहिए | नूतन वर्ष के कारण-कृषि प्रधान -खिल -वताशे अर्पण करने चाहिए | यदि षोडशोपचार पूजन न कर सकें तो -पंचोपचार -तिलक ,अक्षत ,पुष्प ,फल मिष्ठान से पूजा करनी चाहिए | यन्त्र -श्री यन्त्र ,कुवेर यन्त्र  की राजसोप्चार पूजन-से साधना करनी चाहिए |मंत्र -श्री सूक्त ,गणेश अथर्वशीर्ष ,लक्ष्मी जी के मन्त्र के जाप करने चाहिए | तंत्र -चौमुखी २ दीप तेल {तील }एवं घी के दीपक जलाकर कठोर साधना करनी चाहिए | ये अपने -अपने योग्यतानुसार करें |  साथ ही स्थिर लग्न में करें |---
     स्थिर लग्न का समय प्रातः -८-१० से १०-२८ वृश्चिक लग्न में पूजा करें |     
                दोपहर -१४-१४से १५-४२ तक कुम्भ लग्न  में पूजा करें |
                      शाम -१८-४३ से २०-३९ तक वरिश लग्न में अर्चना करें |
                            रात्रि -१-१२ से ३-२९ तक सिंह लग्न में विशेष पूजा करें |
  "यं यं चिन्त्यते कामं तं तं प्राप्नोति निचचितम"|  माँ भगवती कहती हैं -जो जिस-जिस  भाव से पूजा करते हैं ,हम उस -उस भाव की पूर्ति निश्चित करते हैं ||
           भवदीय निवेदक "झा शास्त्री "{मेरठ -उत्तर प्रदेश }
               त्रिमासिक पत्रिका -"यदुवंश गंगा "टीकमगढ़ -{मध्य प्रदेश }
                             सम्पर्कसूत्र -०९८९७७०१६३६,09358885616
                            

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

"दीपावली की शुभ कामनाएँ"

"दीपावली की शुभ कामनाएँ"
      माँ- "लक्ष्मी" एवं भगवान् "कुवेर" की कृपा सभी मित्रों पर निरंतर बनी रहे | किन्तु -लक्ष्मी एवं कुवेरजी के आगमन पर हमलोग विवेकवाण भी भने रहें |  {fact of life-Alwys share ur problm only to 1% ppl who genuinely luvs u,coz50% ppl dnt care of ur problem n495% ppl become happy tht u hv a problem..!!}
     {Have a nice day,Ram-Ran,Namskaar}

शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

"आपके नक्षत्र "वाटिकाओं से भी प्रसन्न होते हैं ?"

       "आपके नक्षत्र "वाटिकाओं से भी प्रसन्न होते हैं ?"
मित्रप्रवर -राम राम ,नमस्कार |
         हमारे ऋषि -मुनियों ने प्रत्येक ग्रह एवं नक्षत्र से सम्बंधित पौधों के बारे में जानकारी की थी ,तथा नवग्रह एवं नक्षत्र वाटिकाएं की जानकारी कुछ ग्रंथों के द्वरा उपलभध भी करायी थी 
      {१}-नारद पुराण{पौराणिक ग्रन्थ }{२}-नारद संहिता {ज्योतिष ग्रन्थ }{३}-राज निघंटु व्रेहतधुश्रुत{आयुर्वेदिक ग्रन्थ }{४}-शारदादितिलक {तांत्रिक ग्रन्थ -मन्त्र महार्णव ,श्रीविद्यार्नव,तंत्र आदि  {६}अन्य ग्रन्थ-आन्दास्रम,प्रकाशन ,वनस्पति ,अध्यात्म नक्षत्र -वृक्ष  इत्यादि ||
            इन तमाम ग्रंथों के मध्यम से जाना जा सकता है -नक्षत्र वाटिकाओं से कितना लाभ हो सकता है | सदैव से यह भी मान्यता रही है -कि ग्रह नक्षत्रों के कुप्रभावों से वृक्ष एवं वनस्पतियाँ समाप्त या कम जरुर कर सकती हैं | भारतीय मान्यता में -सूर्य मंडल  के समस्त सदस्यों व उपसद्स्यों {जिसमें सूर्य एवं चंद्रमा भी शामिल हैं }को ग्रह कहा गया है |ये{ग्रह } धरती के करीब होने से इनकी स्थिति नित्य बदलती रहती है | नक्षत्र -धरती से अत्यधिक दूर होने के कारण परिवर्तन का अनुभव नहीं हो पाता है , अतः नक्षत्र को स्थिर कहे गए हैं | ज्योतिष विद ने -चंद्रमा के रास्ते को २७ भागों में बाटें हैं| प्रत्येक -२७ वें  भाग में पड़ने वाले तारामंडल के बीच कुछ विशेष तारों को पहचान कर उन्हें एक नया नाम दिया -जिन्हें हमलोग नक्षत्रों के नाम से जानते हैं |-इस प्रकार से -नवग्रहों एवं २७ नक्षत्रों की ज्योतिष में पहचान की गयी है ||
    अस्तु -जिस प्रकार से शारीरिक कष्ट को दूर करने कुछ विशेष प्राप्ति के लिए हमलोग जिस प्रकार से रत्न धारण करते हैं |उसी प्रकार से -ग्रहों एवं नक्षत्रों से सम्बंधित पौधों को उगाने से भी लोगों को मनोवांछित फल मिल सकता है | -महर्षि चरक के अनुसार धर्म ,अर्थ ,कम ,मोक्ष  को प्राप्त करने हेतु -आरोग्य रहना आवश्यक है |स्वस्थ शरीर एवं दीर्घ जीवन प्राप्त करने के लिए  भोजन ,शुद्ध  ,वायु ,जल ,तथा प्रदूषण रहित पर्यावरण आवश्यक है |  बाबा तुलसी दास जी के अनुसार -
                      "गगन समीर अनल जल धरनी |
                        इनकी नाथ सहज जड़ करनी ||
हमारे जीवन की भव्यता में -वनस्पतियों की अहम् भूमिका सदैव रही है |लगभग सभी कालों में -वन वाग ,उपवन ,वाटिका ,सर कूप ,वासी सोहई  की प्रथा रही है |आज भी हरियाली तथा शुद्ध पर्यावरण के प्रति हम जागरूक हैं ||
       {१}-सूर्य की प्रसन्नता के लिए -मदार का वृक्ष लगायें |{२}-सोम {चंद्रमा }के लिए पलाश का वृषा लगायें {३}मंगल -के लिए खैर का वृक्ष {४}बुध के लिए  -अपामार्ग {लटजीरा }का वृक्ष लगायें {५}गुरु के लिए -पीपल का वरिश लगायें {६} शुक्र के लिए गूलर का वृक्ष {७}शनि के लिए -शमी का वृक्ष {८}राहू के लिए-दूब लगायें {९}केतु के लिए -कुशा लगायें ||
        कम हम २७ नक्षत्रों से सम्बंधित पौधों से लाभ का जिक्र करेंगें ||
भवदीय निवेदक -ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ -उत्तर प्रदेश }
     त्रिमासिक पत्रिका -संवाददाता {टीकमगढ़ -मध्य प्रदेश }
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शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2011

" आपका भाग्य कितना प्रवल है?"

       " आपका भाग्य कितना प्रवल है?" 
      मित्रप्रवर ,राम राम ,नमस्कार ||
अपने भाग्य को जानने की तमन्ना सबको होती है ,होनी भी चाहिए ,परन्तु ज्योतिष के १२ भाव देखने में छोटे लगते हैं किन्तु जानकारी -वर्तमान ,भूत ,भविष्य की सही देते हैं -जब तो सनातन धर्म की तरह सदियों से आ रही ये विद्या {ज्योतिष }आज भी यथाबत है ||
          अस्तु -जब हम अपने भाग्य को ज्योतिष के द्वारा जानने की कोशिश करते हैं -तो भाग्य के आगे कर्म भाव है ,और जब हम कर्म करते हैं तो प्रतिफल जरुर मिलता है |कुंडली के नवम भाव को -भाग्य एवं धर्म के नाम से जाना जाता है |
      यदि हम -कर्मकांड के शास्त्रों की बात करें -"भाग्यम फलती सर्वत्र ,न विद्या न च पौरुषम " =भाव के लिए कोई विद्या या पराक्रम की जरुरत नहीं होती है -वो पूर्व कृत कर्म का फल जरुर मिलता है ||
           यदि हम -विधाता की बात करें तो जब जीव गर्भ में आते हैं -तभी -
                                  "आयु कर्म च वित्तं च ,विद्या निर्धन मेव च |
                                    पंचैत्रनाय्पी सिद्यंती ,गर्भास्थासयीव देहिनः ||
 जीव के -आयु ,कर्म ,वित्त ,विद्या ,निर्धनता ये गर्भ में ही पूर्व कर्म के अनुसार निर्धारित हो जाते हैं ||
      फिर भी हमलोगों के भाग्य -ज्योतिष की नजर में कैसे हैं -जानते हैं :-
    {१}मेष राशि के जातक -१६ से ३२ वर्ष के बीच भाग्य का लाभ -कर्म ,धर्म ,{पिता }तथा श्रम से पाते हैं|
      {२}-वृष-राशि के जातक -२० से ४० वर्ष के बीच -कूटनीति ,एवं अपनी सोच से भाग्य का लाभ पाते हैं |
    {३}मिथुन -राशि के लोग -१७से ३४ वर्ष के बीच -कला,विद्या, अनुदान से प्राप्त करते हैं भाग्य का लाभ |
    {४}-कर्क -राशि के लोग -१५से  ३२ वर्ष के बीच अनायास प्राप्त करते हैं भाग्य का लाभ |
      {५}-सिंह राशि के लोग -७,१४,२१,२८,तक अपनी प्रभुता के बल पर प्राप्त करते हैं भाग्य का लाभ |
     {६}-कन्या -राशि के लोग -१६ से ३४ के बीच -अपनी क्षमता या मधुरता से भाग्य का लाभ पाते हैं |
    {७}-तुला -राशि के लोग -अपनी प्रतिभा {विरासत }से १९से४०के बीच भाग्य का लाभ पाते हैं |
    {८}-वृश्चि
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क -राशि के लोग -अनायास {किसी के द्वरा }६,१३,१९,२६,३५ वर्ष के बीच लाभ पाते हैं |
   {९}धनु राशि के लोग -अपने परिजनों {कला }के द्वारा भाग्य का लाभ -१७,से ३५ वर्ष के बीच पाते हैं |
   {१०}-मकर राशि के लोग -१८-से ३८ के बीच -उद्योग,या विरासत से  भाग्य का लाभ पाते हैं |
   {११}कुम्भ राशि के लोग -२१से४२के बीच अपनी क्षमता ,पैत्रिक लाभ या कर्म से लाभ पाते हैं |
   {१२}मीन राशि के जातक -१३से २६ के बीच -किसी के द्वारा या संयोग वश लाभ जरुर पाते हैं ||
                 भवदीय निवेदक "झा शास्त्री "
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बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

"अयोध्या एवं जनकपुर की तरह मेरठ भी राममय है ?"

     "अयोध्या एवं जनकपुर की तरह मेरठ भी राममय है ?"
  मेरठ = मय नाम के दानव जहाँ हुए -उसका नाम मेरठ पड़ा | जहाँ कभी मंदोदरी नित्य पूजा अर्चना करती है | जिस भूमि से स्वतंत्रता की पहली शुरुआत हुई | जिस भूमि पर लोग समुदाय विवाद के कारण-लोग आना और रहना पसंद नहीं करते थे कभी ,जी हाँ उस भूमि का नाम मेरठ है | उत्तर में -हरिद्वार ,दक्षिण में -दिल्ली ,पूर्व में -मुरादावाद ,तथा पश्चिम में -बागपत {हरियाणा }मेरठ -चारो तरफ से सुरक्षित -चाहे व्यापर हो ,आवागमन के रास्ते हो,या फिर -प्राकृतिक देन हो, सभी संपदाओं से युक्त होने के वाद भी, आपसी विवाद ने प्रगति बहुत दिनों तक नहीं होने दी ,किन्तु -समय की धारा ने-मेरठ -को भी प्रगति के पथ पर ले चल रही है | अब यहाँ के लोग आपस में मिलजुलकर रहते हैं ,अपने -अपने कार्ज़ में सभी दक्ष हैं | अब यहाँ -शिक्षा ,व्यापर,उद्योग ,यातायात की सुविधा ,ओषधालय ,यानि सभी लोकिक और अलौकिक वस्तुओं से युक हैं प्रायः | यहाँ का हेंडलूम ,कैची ,वाद्य्समग्री तो विश्व प्रसिद्द है ही ||
       मेरठ -की सबसे बड़ी विशेषता -सभी लोगों के मुख में "श्री राम " का निरंतर निवास रहता है | जब मिलते हैं तो राम -राम, जाते हैं तो राम -राम ,फ़ोन से बात करते हैं तो राम -राम ,ये राम -राम यदि कोई एक बार करता है तो जबाब में २बार राम -राम बोलते हैं | जब हम अयोध्या जाते हैं तो वहां तो यह अभिवादन होता है ,जब हम मिथिला {जनकपुर }जाते हैं तो वहां भी राम नाम शब्द सुनने को मिल जाते हैं, किन्तु मेरठ की धरती पर यह शब्द हमें भेद भाव रहित प्रेम का एक अद्भुत रस से सरोबार करते हैं ,यद्यपि श्री राम तो विश्व के हैं,संसार के सभी के लिए राम और रामायण अनमोल हैं ,फिर भी मेरठ भूमि -अयोध्या या जनकपुर से कम राममय प्रतीत नहीं होती है ||
   भवदीय निवेदक -कन्हैया लाल झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
           त्रिमासिक पत्रिका -"यदु वंश गंगा "
                   टीकमगढ़ {मध्यप्रदेश }
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मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

वास्तु -अर्थात निवास स्थान की शुद्धि ?"

     वास्तु -अर्थात निवास स्थान की शुद्धि ?" 
जिस भूमि पर जीव निवास करते हैं -उसे वास्तु कहा जाता है | वास्तु  के शुभाशुभ फल प्राप्ति के लिए -"मत्स्य पुराण-अ०-२५१ में लिखा है कि अंधकासुर के वध के समय भगवान् शंकर के ललाट से -पृथ्वी पर जो स्वेदबिंदु गिरे उनसे एक भयंकर आकृति का पुरुष प्रकट हुआ | जिसने अन्धकगणों का रक्त पान किया-फिर भी अतृप ही रहा | अतृप्त होने के कारण-त्रिलोकी को भक्षण करने के लिए चल दिया | जिसे महादेवादि देवों ने पृथ्वी पर सुलाकर -वास्तु देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया और उसके शरीर में सभी देवताओं ने वास किया ,इसलिए वह वास्तुपुरुष  या वास्तुदेवता कहलाने लगे | देवताओं ने वास्तुको-गृहनिर्माण आदि के वैश्वदेव बलि के तथा पूजन ,यग्य, यागादी के समय पूजित होने का वर देकर कहाकि -वापी ,कूप ,तड़ाग ,गरी ,मंदिर ,बाग़ बगीचा जीर्णोंधार ,यग्य मंडप ,निर्माणदि के समय -जो तुम्हारी पूजा प्रतिष्ठा अर्चना करेंगें उन्हें सभी प्रकार की सौख्य समृद्धि मिलेगी ||
    भाव -आजकल वास्तु दोष का निदान हमलोग अपने तरीके से करने लगे हैं ,जो उचित नहीं है | वास्तु का सही निदान पूजन ही है न कि चमक -धमक | यदि वास्तु अर्थात भूमि कि वो जगह जहाँ हम निवास करते हैं -को ठीक रखना है तो आधुनिक निदान नहीं प्राचीन निदान करें -जो सहज के साथ -साथ  लाभदायक भी है ||
         भवदीय -ज्योतिष सेवा सदन"झा शास्त्री "{मेरठ -उत्तर प्रदेश }
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सोमवार, 17 अक्टूबर 2011

"प्रचार का अभिप्राय -प्रसार है न कि शर्मसार ?"

     "प्रचार का अभिप्राय -प्रसार है न कि शर्मसार ?"
मित्रप्रवर ,राम राम ,नमस्कार ||
       प्रचार का अर्थ प्रसार होता है ,किन्तु उसका प्रसार तभी संभव होता है ,जब अपने गुण {गुणबत्ता }के कारण लोगों के दिल में अपनी जगह बना लेता है ,किन्तु इसमें समय लगता है ,इसके लिए अपना परिश्रम ,लगन ,विस्वास ,धन के साथ -साथ उपर वाले एवं भाग्य की भी आवशयकता होती है | यदि इन तमाम बातों में से एक भी कम हो जय तो प्रचार नहीं -शर्मसार हो जाता है ||
       कभी हमलोग सादगी जीवन बिताते थे -तो कारण अनभिज्ञता थी | आज हम अलौकिक जीवन जीते हैं -तो वजह प्रचार ही है |चाहे -परिधान हो ,अलंकरण की वस्तुएं हो ,या रोजमर्रा की चीजें ही क्यों न हो -प्रचार ने हमें -अपने में समेत लिया है ,हम चाहकर भी अपने जीवन में कटोती नहीं कर पाते हैं ||
             =ज्योतिष एवं ज्योतिषी भी अपने आपको नहीं रोक पाए ,समय की धारा ने हमें भी अपनी और खीच ली | किन्तु यदि हम -ज्योतिष अर्थात- नेत्र ,नेत्र अर्थात -तेज ,अपने तेज ,अपनी शक्ति के बल पर लोगों के ह्रदय में जगह बना सकते हैं -इसके लिए कर्मठ होना पड़ेगा ,सहनशील भी बनना पड़ेगा ,तप और साधना के द्वरा अपनी डगर पर अडिग रहना पड़ेगा |तभी हम भी प्रचार का प्रसार करेंगें नहीं तो -शर्मसार ही करेंगें ||
          यह ज्योतिष सेवा सदन -आपकी सेवा में तत्पर रहते हैं ,रात्रि ८ से ९ ऑनलाइन या सम्पर्कसूत्र द्वरा |
                 हम आने वाले सभी मित्रों का निस्वार्थ सेवा करेंगें ,सभी आगंतुक मित्रों का निष्पक्ष मदद करेंगें ,सही राह दिखाएंगें , हम भेद भाव रहित सेवा करते हैं करते रहेंगें ||
          {१}-आप से जुड़कर ,आपके हित के लिए बताकर हमें प्रसन्नता होती है ,किन्तु आप के सहयोग के बिना हम अकेले यह सेवा नहीं कर पायेंगें ,इसलिए ऑनलाइन सेवा नहीं मिलने पर सम्पर्कसूत्र से सेवा लें, सबको सेवा मिलेगी ,देर हो सकती है ||
        {२}-किन्तु -ज्योतिष की सेवा के लिए -ज्योतिष के प्रति आस्था ,विस्वास होने चाहिए ,अन्यथा सेवा न लें ,क्योंकि आप और हम -महर्षियों की जो अद्भुत देन है ,गुरुओं की जो साधना है -उस मार्ग को धन से नहीं विस्वास से ही प्राप्त कर सकते हैं ||
          भवदीय निवेदक "झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
               सम्पर्कसूत्र -०९८९७७०१६३६,09358885616