"हम और ,हमारे संस्कार "
सम +सरति =संस्कारः जो हमारी छवि को निखारे ,आगे बढाये उसे हम संस्कार कहते हैं |
जब हम माँ के गर्भ से पृथ्वी पर आते हैं ,तो हमारे -"जातकर्म संस्कार" होते हैं उसके पश्चात् "षष्ठी पूजन " प्रयोग प्रायः होते है ,और यह संस्कार प्रायः जीवित हैं | व्रह्मा जी जातक के के भाग्य की रिखा को इसी दिन प्रतिपादित करते हैं | जातक की आयु ,कर्म ,वित्त ,विद्या ,निर्धनता यह षष्ठी पूजन के दिन ही निर्धारी होते हैं -[१]-अतः हमें अपनी आयु की जानकारी सही किसी को नहीं देनी चाहिए | कारण इससे अपने को तो तकलीफ होती ही है ,परिजनों को भी तकलीफ पहुँचती है?
[२]-कर्म अर्थात -आप यदि बढियां कार्ज़ कर रहे हैं तो आपको अहंकार आ सकता है ,और यदि आप किसी तरह से जीवन व्यतीत कर रहे हैं तो भी दुसरे को कष्ट होगा | अतः "कर्म "भी सही जानकारी किसी को नहीं दें?
[३]-वित्त - अपनी संपत्ति की भी सही जानकारी देने ,या तो आपको कष्ट ही होगा या गर्व भी हो सकता है ,तो इसकी भी सही जानकारी नहीं देनी चाहिए?
[४]-विद्या -आप बहुत शिक्षित हैं ,तो और कम पढ़े लिखें हैं तो भी सही जानकारी नहीं देनी चाहिए ?
[५]-निर्धनता होने पर भी अपनी सही जानकारी नहीं देनी चाहिए ,क्योंकि अपना उपहास भी हो सकता है ? भाव -[इन पाँचों चीजों को समयानुसार प्रयोग करें ,इससे आपके जीवन पर बढियां प्रभाव पड़ेगा ]
निवेदक -झा शास्त्री [मेरठ ]
-एकबार सभी मित्रों को निःशुल्क ज्योतिष सेवा संपर्क सूत्र से मिलेगी । -आजीवन सदस्यता शुल्क -1100.rs,जिसकी आजीवन सम्पूर्ण जानकारी सेवा सदन के पास होगी ।। --सदस्यता शुल्क आजीवन {11.00- सौ रूपये केवल । --कन्हैयालाल शास्त्री मेरठ ।-खाता संख्या 20005973259-स्टेट बैंक {भारत }Lifetime membership fee is only five hundred {11.00}. - Kanhaiyalal Meerut Shastri. - Account Number 20005973259 - State Bank {India} Help line-09897701636 +09358885616
भवदीय निवेदक "ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ उत्तर प्रदेश }
"झा शास्त्री "मेरठ {उत्तर प्रदेश }
शुक्रवार, 24 सितंबर 2010
"हम और ,हमारे संस्कार "
प्रस्तुतकर्ता
ज्योतिष सेवा सदन { पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री "}{मेरठ }
पर
शुक्रवार, सितंबर 24, 2010
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें